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हिंदी कहानी – दो नौकर | Inspirational Hindi Story – Two Servants

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प्रेरणादायक हिंदी कहानी – दो नौकर

हिंदी कहानी – दो नौकर | Inspirational Hindi Story – Two Servants | भगवान के दिए हुए दो नौकर – हिंदी कहानी | Two servants of God Hindi Story | Do Naukar – Prernadayak Hindi Kahani | लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक और दादाभाई नौरोजी की प्रेरणादायक हिंदी कहानी | Inspirational Story of Lokmanya Bal Gangadhar Tilak and Dadabhai Naoroji in Hindi

प्रेरणादायक हिंदी कहानी – दो नौकर

Inspirational Hindi Story – Two Servants

यह कहानी उस समय की है जब तिलक महाराज (लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक) और दादाभाई नौरोजी इंग्लैंड में रहते थे।

वे दोनों किराए के मकान में एक साथ रहते थे। दादाभाई नौरोजी को काम करने में बहुत ही आनंद आता था। वह सुबह जल्दी उठकर घर को साफ करते थे, पानी के कंटेनरों (containers) को भरते थे, जूते को पोलिश करते थे और फिर वह स्नान करने के बाद अपने दैनिक (daily) कामों में लग जाते थे।

लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक (Lokmanya Bal Gangadhar Tilak) के सो कर उठने तक सब कुछ स्वच्छ और साफ हो गया रहता था। तिलक महाराज ने सोचा कि दादाभाई ने इन सुबह के कार्यों के लिए जरूर एक नौकर (servant) लगा रखा होगा जो कि इन सब कामों को कर सके।

एक दिन, तिलक महाराज (Tilak Maharaj) जल्दी जाग गए और उन्होंने दादाभाई को फर्श की सफाई (clean) करते देखा।

“अरे! आप क्यों कर रहे हैं? आज नौकर नहीं आया क्या? “तिलक महाराज ने दादाभाई नौरोजी से आश्चर्य जाहिर करते हुए पूछा।

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साख बनाने में बीस साल लगते हैं और उसे गंवाने में बस पांच मिनट, अगर आप इस बारे में सोचेंगे तो आप चीजें अलग तरह से करेंगे।

दादाभाई नौरोजी (Dadabhai Naoroji) ने जवाब दिया, “कौन सा नौकर? हमने कभी भी नौकर (servant) रखा ही नहीं था।

“लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक चौंक गए और उन्होंने पूछा, “तो फिर सुबह में सब काम कौन करता है?”

दादाभाई हंसने लगे और हवा में अपने दोनों हाथ उठाए। और उन्होंने कहा, “ये दो नौकर (servant) हैं! आपको इनसे समयोचित और कुशल नौकर कहाँ मिलेगा? ये कर्मचारी पैसे नहीं मांगते हैं और छुट्टियां भी नहीं लेते हैं।

भगवान (God) ने इतना बढ़िया तोहफा (Gift) दिया है, इसलिए हमें नौकरों की आवश्यकता क्यों होगी?”

लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक, दादाभाई नौरोजी के शब्दों और कार्यों से काफी प्रेरित और प्रभावित हुए। उन्होंने तुरंत अपने सभी कामों को स्वयं करने का और दूसरों पर निर्भर नहीं रहने का फैसला लिया।

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जल्दी गुस्सा करना जल्द ही आपको मूर्ख साबित कर देगा।

शिक्षा | Moral

भगवान ने हमें दो हाथ इसीलिए दिए हैं ताकि हम अपना काम स्वयं कर सके। हमें कोशिश करना चाहिए की हम लोगो पर कम निर्भर रहें और अपना काम स्वयं करें।

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8 Comments

  1. bahut achhi aut motivational kahani share ki hai apne… apka dhanyawad sir

    October 23, 2017
    |Reply
  2. superb story sir………..not only me but whole my outstationcab team bookmysawari and thejourneyindia.com team like your story.

    Really its a true motivational story sir.

    October 29, 2017
    |Reply
  3. बहुत ही बढ़िया कहानी प्रस्तुत की सबसे अच्छी बात यह है कि कहानी को प्रस्तुत करने का तरीका बहुत ही उम्दा है

    November 11, 2017
    |Reply
  4. बहुत अच्छा प्रेरणादायक प्रसंग है शेयार्कारने के लिए शुक्रिया

    November 11, 2017
    |Reply
  5. स्वालंबी बनो-खुश रहो
    अपना काम खुद करने में जो मजा है वो ओर कहा!

    November 19, 2017
    |Reply
  6. अपने हाथ जगन्नाथ , बहुत अच्छा प्रेरक प्रसंग

    November 21, 2017
    |Reply
  7. motivational story

    February 14, 2018
    |Reply

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